
दक्षिण दिल्ली के मदनगीर इलाके में स्थित सेंट्रल मार्केट में अचानक हुई नगर निगम (MCD) की तोड़फोड़ कार्रवाई से दुकानदारों में भारी नाराजगी है। कई दुकानदारों का दावा है कि बिना किसी पूर्व नोटिस के, दुकानों को धराशायी कर दिया गया जिससे उनका सालों पुराना कारोबार एक झटके में खत्म हो गया।
बीते दिनों एमसीडी की टीम ने मदनगीर सेंट्रल मार्केट में ‘अतिक्रमण हटाने’ के नाम पर कार्रवाई की। लेकिन स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि ना कोई नोटिस दिया गया, ना सुनवाई का मौका—बस सीधे बुलडोज़र चला दिया गया।
स्थानीय दुकानदार राजीव शर्मा ने कहा:
“हम यहां 25 साल से दुकान चला रहे हैं। एक सुबह अचानक बुलडोजर आ गया और हमारी पूरी दुकान तोड़ दी गई। कोई नहीं आया बताने कि हमें हटना है।”
एक महिला दुकानदार की आंखों में आंसू थे—“हमारा घर इसी दुकान से चलता था। सब कुछ बर्बाद हो गया।”
इस कार्रवाई के खिलाफ 45 दुकानदारों ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। उनका आरोप है कि यह कार्रवाई बिना किसी नोटिस या सुनवाई के की गई है, जो स्ट्रीट वेंडर्स (Protection of Livelihood and Regulation of Street Vending) Act, 2014 की धारा 10 का सीधा उल्लंघन है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने इस याचिका को गंभीरता से लेते हुए एमसीडी, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस से दो हफ्तों में जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को होगी।
एमसीडी के अनुसार यह कार्रवाई अवैध अतिक्रमण हटाने के तहत की गई थी। पिछले दो हफ्तों में दिल्ली के कई हिस्सों—वसंत कुंज, त्रिलोकपुरी, बवाना, जामिया नगर आदि—में 300 से ज्यादा अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाए गए। इन अभियानों में कई संपत्तियां सील की गईं और इमारतें गिराई गईं।
हालांकि, मदनगीर के इस मामले में सवाल उठ रहे हैं कि क्या नियमों के अनुसार कार्रवाई की गई या नहीं।
एक सामाजिक कार्यकर्ता ने बताया:
“स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट बहुत स्पष्ट है—कोई भी कार्रवाई बिना नोटिस और वैकल्पिक पुनर्वास के नहीं की जा सकती। ये गरीबों की रोज़ी-रोटी का सवाल है।”
स्थानीय निवासियों और व्यापारियों में डर का माहौल है कि क्या आने वाले दिनों में और भी इलाकों में बिना सूचना कार्रवाई होगी।
एक दुकानदार ने कहा—“हमें सरकार से मदद की उम्मीद थी, लेकिन अब हमें डर है कि कहीं और भी दुकानें न टूट जाएं।”
1. क्या मदनगीर मार्केट की दुकानों को तोड़ने से पहले नोटिस दिया गया था?
दुकानदारों का दावा है कि उन्हें कोई नोटिस नहीं मिला। इस मुद्दे पर दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है।
2. क्या यह कार्रवाई कानूनी है?
स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट के तहत किसी भी दुकान को हटाने से पहले नोटिस और पुनर्वास अनिवार्य है। अगर यह नहीं किया गया, तो कार्रवाई को अवैध माना जा सकता है।
3. अब दुकानदारों को क्या रास्ता मिलेगा?
मामला कोर्ट में है, और दुकानदार पुनर्वास, मुआवज़ा और न्याय की मांग कर रहे हैं। अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को निर्धारित है।
4. क्या एमसीडी ऐसे और अभियान चला रही है?
हां, एमसीडी ने हाल के हफ्तों में दिल्ली के अन्य इलाकों में 300 से अधिक अतिक्रमण हटाने की कार्रवाइयां की हैं।
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